सोमवार, 2 सितंबर 2024

साहित्य के शूर विनय विक्रम सिंह

     त्तर प्रदेश के जिले कानपुर में जन्मे, कक्षा पाँच के बाद, पिताजी का ट्रान्सफर लखनऊ होने पर, विनय विक्रम सिंह की आगे की शिक्षा-दीक्षा, नफ़ासत और अदब के शहर लखनऊ में हुई। इन्होंने कला एवं शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ से स्नातक किया है तथा हिन्दी, अंग्रेजी, अवधी एवं मराठी भाषाओं में पारंगत हैं तथा वर्तमान में स्वयं स्थापित "ट्विनब्रेन्स" एक सीजीआई स्टूडियो में चीफ क्रिएटिव ऑफिसर के तौर पर एनीमेशन,आर्ट व गेम डिज़ाइन के क्षेत्र में कार्यरत हैं। 

विनय विक्रम सिंह ने भारत के एनिमेशन के पितामह पद्म श्री स्व. राम मोहन के साथ कई एनिमेशन फिल्म्स का दिग्दर्शन और क्रियान्वयन किया है। इन्होंने यूनिसेफ की मीना और मिट्ठू सीरीज़ का एनिमेशन (भारत के लिये), सारा की एनिमेशन सीरीज (अफ्रीका के लिये) एवं 100 से भी अधिक अंतरराष्ट्रीय एनिमेशन धारावाहिकों का एनिमेशन और निर्देशन, स्क्रिप्ट और क्रियान्वयन भी किया है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, जापान और फ्रांस आदि देशों में गेम डेवलपमेंट के कई प्रोजेक्ट पर कार्य किया है।

       साहित्यिक अभिरुचि व लेखन के बीज इनके मन में सातवीं-आठवीं कक्षा से पड़ने लगे थे। तब रिज़र्व बैंक ऑफ इण्डिया में कार्यरत, इनके पिताजी लाइब्रेरी से उपन्यास लेकर आते थे। गम्भीर साहित्य के पठन-पाठन ने चिन्तन और रचनाशीलता के द्वार खोल दिये। समय के साथ-साथ चलते हुए, स्वाध्याय के द्वारा छंदाधारित कविता, गीत, कहानी एवं लघुकथा इत्यादि विधाओं में अपनी कलम को चलाते चले आ रहे हैं। इन्हें कला एवं लेखन के क्षेत्र में अनेक पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। तीस वर्षों के अनुभवकाल में, कला के क्षेत्र में इन्हें 40 से अधिक राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान के साथ, इन्हें विश्वख्यात "कान्स लायन्स" भी प्राप्त हुआ। विनय विक्रम सिंह अवधी के प्रचार-प्रसार को समर्पित संस्था बैसवाड़ा अवधी संस्थान के संस्थापक भी हैं। हमने कुछ प्रश्नों के माध्यम से साहित्य के शूर विनय विक्रम सिंह की साहित्यिक यात्रा के विषय में जानने का लघु प्रयास किया है।

सुमित प्रताप सिंह - आपको लेखन का रोग कब और कैसे लगा?

विनय विक्रम सिंह - मैं इसे रुचि का नाम देना पसन्द करूँगा। स्वयं को अभिव्यक्त करने के लिये वार्त्ता का गुण सबके पास है किन्तु, काव्य के द्वारा अभिव्यक्ति रचनात्मकता है। काव्य कथ्य का शृङ्गार है। पद्य में जनस्पर्श है, दीर्घजीविता है। मेरा लेखन हाईस्कूल (1987-88) के समय प्रारम्भ हुआ था। तब मेरा लेखन छन्दमुक्त होता था।

सुमित प्रताप सिंह - लेखन से आप पर कौन सा अच्छा अथवा बुरा प्रभाव पड़ा?   

विनय विक्रम सिंह - कोई भी रचनात्मक गतिविधि या रुचि सदैव सकारात्मक गुण उत्पन्न करती है। मेरा संबंध कला क्षेत्र से है। लेखन भी एक रचनात्मक विधा है। कला व लेखन दोनों ही मुझे स्वयं से साक्षात्कार कराते हैं, विविध भाव और कल्पनाओं के द्वारा मुझसे रचना करवाते हैं। यह अनुभव सदैव ही सन्तुष्टि प्रदान करता है, मुझे और भी उत्तरदायी व परिपक्व बनाता है। 

सुमित प्रताप सिंह - क्या आपको लगता है कि लेखन समाज में कुछ बदलाव ला सकता है?

विनय विक्रम सिंह - जी, लेखन बदलाव लाता है और लाता रहेगा। यदि सामाजिक चेतना सुप्त है तो उसे जगाने का कार्य लेखन कर सकता है। लेख, निबन्ध, कविता, कहानी आदि तमाम विधाएँ हैं, जो जनमानस को उद्वेलित कर सकने में सक्षम हैं। किसी भी राष्ट्र की जनचेतना, उसकी संस्कृति और साहित्यिक नींव पर निर्भर होती है।

सुमित प्रताप सिंह - आपकी अपनी सबसे प्रिय रचना कौन सी है और क्यों? 

विनय विक्रम सिंह - मुझे अपने अवधी निर्गुण दोहे और उलटबाँसियाँ प्रिय हैं। वे चिन्तन को परिपूर्ण करते हैं, चित्त में आध्यात्मिक और तात्विक विमर्श को पुष्ट करते हैं।

सुमित प्रताप सिंह - आप अपने लेखन से समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं?

विनय विक्रम सिंह - मैं अपने लेखन से समाज के उन विषयों को सामने लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर लिखने से अधिकांशतः रचनाकार कतराते हैं। हर लेखनी प्रखर हो, मुखर हो, क्षणिक स्वार्थ से परे होकर और सत्य लिखे, यही मेरा समाज को सन्देश है।

सोमवार, 19 अगस्त 2024

नॉस्टैल्जिया का गुलदस्ता है सिक्स ऑफ कप्स


    युवा कवयित्री सुश्री नेहा बंसल के हाल ही में प्रकाशित दूसरे अंग्रेजी कविता संग्रह 'सिक्स ऑफ कप्स' को पढ़ने का अवसर मिला। इससे पहले कवयित्री साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित अंग्रेजी कविताओं के संग्रह 'हर स्टोरी' के माध्यम से पाठकों के लिए उन नारियों की कहानियाँ लेकर आयीं थीं, जिनके बारे में समाज ने लिखना उचित नहीं समझा और यदि लिखा भी है तो उसे नगण्य की श्रेणी में ही रखा जाएगा। दूसरे कविता संग्रह में उन्होंने अपनी भूली-बिसरी यादों को स्थान दिया है। इस पुस्तक को कवयित्री ने अपने बाबा और अपने आईपीएस अधिकारी पति श्री दीपक यादव को समर्पित किया है। पुस्तक की भूमिका में कवयित्री ने इस कविता संग्रह को पाठकों के बीच लाने के उद्देश्य को बताने के लिए पत्रकार डौग लार्सन के कथन का उल्लेख किया है कि नॉस्टैल्जिया एक फाइल है जो अच्छे पुराने दिनों की खुरदरी धारों को हटा देती है। कवयित्री पुस्तक का शीर्षक सिक्स ऑफ कप्स रखने के प्रति पाठकों की जिज्ञासा का समाधान करते हुए बतातीं है, कि इसका शीर्षक एक छोटे आर्काना टैरो कार्ड के नाम पर रखा गया है।  भूमिका के उपरांत दो पृष्ठों में कवयित्री ने इस कविता संग्रह के प्रकाशित होने तक सहयोगी रहे मित्रो, बंधुओं व सहकर्मियों का आभार प्रकट किया है।

    इस कविता संग्रह में कुल 49 कविताएं एवं 3 हाइकु संकलित हैं। कवयित्री ने जहां इस पुस्तक की पहली कविता अपने दादा जी पर लिखी है, वहीं उनकी दूसरी कविता पुरानी दिल्ली में स्थित नानी जी के घर पर केंद्रित है, जो कि उनके अपने बड़े-बुजुर्गों के प्रेम व आदर तथा अपनी जड़ों से जुड़ाव को दर्शाती है। कवयित्री का अपने दादा जी से लगाव का ही परिणाम है कि उनकी उपस्थिति इस कविता संग्रह की कई कविताओं में दर्ज हुई है।  कवयित्री ने  विभिन्न त्योहारों, दूरदर्शन, जीवन में पहली बार खाए डोसे, गुड़िया, पिकनिक, भौतिकी विषय, प्रेम गीत, कलकत्ता में साड़ी खरीदने, बचपन की रामलीला, चंडीगढ़ के रॉक गार्डन, मूंग दाल के हलवे, घर के माली शिवचरण, सांची स्तूप, जन्मदिन की पार्टी, अंधविश्वास, पुदीना की चटनी, कागज की नाव इत्यादि विभिन्न विषयों पर बहुत सुंदर तरीके से अपनी कलम चलाई है। इस कविता संग्रह की कविताओं में कवयित्री द्वारा बीते हुए दिनों को फिर से जीवंत करने का प्रयास किया गया है। संवेदना, भावुकता एवं मार्मिकता से परिपूर्ण कविताएं हृदय को गहराई से छू लेती हैं। इस कविता संग्रह की माय ग्रैंड पा, नानी हाउस इन देल्ही-6, सिक्स ऑफ कप्स और महाशिवरात्रि इत्यादि कविताएं तो बहुत ही प्रभावशाली बन पड़ी हैं। इस कविता संग्रह की अंतिम कविता वीकेंड इन कार निकोबार को पढ़कर समाप्त करने के पश्चात ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पाठक को कवयित्री के बचपन से युवावस्था के सफर में साथ यात्रा करते हुए शरारत से भरे, मनोरंजक, भावपूर्ण, उत्साह से भरपूर और संघर्षमय जीवन से साक्षात्कार करने का अवसर प्राप्त हुआ हो। दूसरे शब्दों में कहें तो सिक्स ऑफ कप्स नॉस्टैल्जिया का गुलदस्ता है।

    प्रशासनिक सेवा में रहते हुए भी कवयित्री का संवेदना, भावुकता और समाज के प्रति कर्तव्य की भावना दर्शाता लेखन साहित्य जगत के लिए सुखद अनुभूति का आभास करवाता है। आशा है कि अंग्रेजी काव्य जगत कवयित्री की पिछली पुस्तक हर स्टोरी की भांति उनकी दूसरी पुस्तक सिक्स ऑफ कप्स को भी प्रसन्नता व उत्साह के साथ स्वीकार करेगा। मेरी ओर से सिक्स ऑफ कप्स की लेखिका सुश्री नेहा बंसल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!

पुस्तक - सिक्स ऑफ कप्स

लेखिका - नेहा बंसल, नई दिल्ली

प्रकाशक - हवाकाल प्रकाशन, दिल्ली

पृष्ठ - 107

मूल्य - 400 रुपये

समीक्षक - सुमित प्रताप सिंह, नई दिल्ली

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...