उत्तर प्रदेश के एक थाने में एक अपराधी के संबंध में आमद करवाने गया तो रोचनामचा मुंशी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के ही निकले। मैने उनसे वहां के थानाध्यक्ष के बारे में पूछा तो मुंशी जी ने बताया कि वे फलानी जाति के हैं। उस इलाके में ढिमकानी जातियों का बाहुल्य होने के कारण उन जातियों के थानाध्यक्ष उस थाने में नहीं लगाए जाते हैं। सरकार को शायद इस बात का डर रहता है कि कहीं उन जातियों के थानाध्यक्ष विपक्षी दल वालों का सहयोग न करने लगें और चुनाव में सरकार का समीकरण बिगड़ जाए। मुंशी, जो अलानी जाति से था, ने बताया कि उस थाने में चूंकि थानाध्यक्ष फलानी जाति के हैं तो वहां फलानी जाति के पुलिस कर्मियों की बहुलता है और चलती भी उन्हीं की है। मैंने हंसकर कहा कि इसका मतलब है कि अलानी जाति वाले पुलिस कर्मी इस थाने में अल्पसंख्यक हैं तो उसने हंसकर कहा कि हम ही अल्पसंख्यक नहीं हैं बल्कि और जाति वाले भी अल्पसंख्यक की भूमिका में हैं। तभी मुंशी के फोन पर किसी अन्य पुलिस कर्मी का फोन आया और वह मुंशी से फोन पर बहस करने में लग गया। फोन कटने पर मैंने उससे पूछा कि क्या बात हो गई तो वह हंसते हुए बोला कि महाशिवरात्रि के इंतज़ाम में फलानी जाति के पुलिस कर्मियों को छोड़ कर बाकी सभी पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई थी। कल पास की नहर में एक आदमी डूब गया। उस डूबते हुए आदमी को बचाने के लिए पुलिस ने गांव के एक तैराक को नहर में कुदवाया पर बदकिस्मती से वह तैराक भी नहर में डूब गया। अब आसपास के गांव वाले दूसरे आदमी के डूबने का दोष पुलिस पर मढ़ रहे हैं। इस आपातकालीन स्थिति से बचने के लिए पुलिस की एक टुकड़ी चाहिए जिसमें बचे हुए थानाध्यक्ष की जाति के सारे पुलिसकर्मी भाइयों का नाम शामिल है इसी कारण फोन पर वह साथी मुझसे बहस करने में लगा हुआ था। थाने से बाहर निकला तो मुंशी जी के ही जाति भाई मिल गए। उन्होंने बताया कि थानाध्यक्ष भले आदमी हैं। वे यदि साठ प्रतिशत अपनी जाति के पुलिसकर्मियों के लिए करते हैं तो पचास प्रतिशत बाकी जाति के पुलिस कर्मियों के लिए भी करते हैं। अब हर जाति वालों को कम से कम अपनी जाति के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से इतनी आस तो रखनी ही चाहिए और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का भी ये कर्तव्य है कि वह अपनी जाति वाले कनिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सुख-सुविधा का पूरा ध्यान रखे। मैंने उस पुलिस कर्मी और उस थाना जातिपुरम को प्रणाम किया और वापिस अपने घर की राह पकड़ ली। वैसे ध्यान देने वाली बात ये है कि इस देश में ये इकलौता जातिपुरम थाना नहीं है। इस देश में ऐसे जातिपुरम थानों की संख्या भरपूर मात्रा में उपलब्ध है।
रचना तिथि - 16.02.2026