बुधवार, 24 जून 2026

रहस्य और रोमांच से भरपूर उपन्यास कालदंड


    कालदंड उपन्यास युवा लेखक लोकेश कौशिक की पहली पुस्तक है। रहस्य और रोमांच से भरपूर इस उपन्यास में लोकेश पाठकों को आरंभ से अंत से बांधे रहते हैं। उपन्यास में लेखक ने प्रत्येक वस्तु, स्थान, व्यक्ति के व्यक्तित्व व मानसिक स्थितियों का जो गहराई से वर्णन किया है वो लेखक के लेखकीय कौशल का कमाल है।

उपन्यास की कहानी बलि के नाम पर किसी तांत्रिक द्वारा दो बच्चों की निर्मम हत्या से आरंभ होती है। उपन्यास के मुख्य पात्र विशु के माध्यम से उपन्यास के कथ्य को गढ़ा गया है। इसमें दर्शायी गयी कथा के माध्यम से लेखक ने समाज में फैले अंधविश्वास व जादू, टोना-टोटका जैसी कुप्रथाओं पर अपनी लेखनी के माध्यम से प्रहार किया है। लेखक ने ये दर्शाने का प्रयास किया है कि बलि के नाम पर किसी की हत्या कर अपने इष्ट से कुछ प्राप्त करने की लालसा करना मूर्खता और भ्रम के अतिरिक्त कुछ नहीं है।

उपन्यास में जहाँ कुछेक स्थान पर सारंग व सावित्री के प्रेम दृश्यों की उपस्थिति पाठकों के हृदयों को कोमलता से छूती हुई उनमें प्रेम के अनेक कमल खिला देती है, वहीँ माखन, भूरा व उसके साथियों द्वारा क्रूरतापूर्वक सारंग के कबीले के पुरुषों, महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों का निर्ममता से किया जाने वाला संहार पाठकों को मन-मस्तिष्क को उद्वेलित कर देता है।

कुल मिला कर ‘कालदंड’ पठनीय उपन्यास है। दूसरे शब्दों में कहें तो लोकेश कौशिक में हिन्दी लेखन जगत में अच्छी ओपनिंग की है और मुझे आशा के साथ पूर्ण विश्वास है कि लोकेश कौशिक हिन्दी लेखन जगत में लंबी पारी खेलेंगे। मेरी ओर से उन्हें लेखन में स्वर्णिम भविष्य हेतु हार्दिक शुभकामनाएं एवं शुभाशीष!

सुमित प्रताप सिंह 


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