गुरुवार, 13 अगस्त 2020

बिनोद हमारे दिलों में है


      ये ज़माना ट्रेंडिंग का है। सोशल मीडिया पर कब क्या ट्रेंड हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इन दिनों ट्विटर पर ट्रेंडिंग की जिम्मेवारी बिनोद ने संभाल रखी है। देश की अधिकांश ट्विटरी जनता इस बात को जानने की इच्छुक है कि आखिकार बिनोद को क्यों ट्रेंड किया जा रहा है।

असल मे यह सब एक यू-ट्यूब चैनल Slayy Point से शुरू हुआ, जब उसके क्रिएटर अभ्युदय और गौतमी ने अपने वीडियो पर आने वाले कमेंट पर एक वीडियो बनाने का सोचा। 15 जुलाई को उन्होंने अपने चैनल पर ‘Why Indian Comments Section is Garbage (BINOD)’ नाम से एक वीडियो शेयर किया। जिसमें उन्होंने लोगों के कुछ अजीबोगरीब कमेंट्स दिखाए। इस वीडियो में बिनोद थारू नाम के एक शख्स ने हर कमेंट में सिर्फ बिनोद लिखा था। वीडियो के सामने आने के बाद से ही लोगों ने हर यू-ट्यूब वीडियो पर कमेंट में बिनोद लिखना शुरू कर दिया।

जल्द ही यह ट्रेंड Twitter पर भी लोकप्रिय हो गया। विचारणीय प्रश्न ये है कि बिनोद थारू नामक व्यक्ति क्यों सभी जगह बिनोद लिखता फिरता है।

यदि हम इस विचारणीय प्रश्न पर विचार न भी करें तो भी बिनोद के इस बिनोदी व्यवहार का कारण समझा जा सकता है। इस संसार में हर इंसान अपनी रोटी, कपड़ा और मकान इत्यादि आवश्यकताओं के पूरा होने बाद अपने दिल में एक सपना पालना शुरू करता है। उस सपने का नाम है 'जग में नाम कमाना'। नाम कमाने के लिए लोग दान देते हैं, लोगों की सहायता करते हैं और स्कूल, धर्मशाला इत्यादि का निर्माण करते हैं। जो ये सब नहीं कर पाते हैं वे अपने इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सोशल मीडिया पर बैठ जाते हैं। शायद इसी सपने को साकार करने के लिए बिनोद ने अपना बिनोदी अभियान शुरू किया होगा।

बहरहाल बिनोद को अपने परिश्रम का लाभ मिला और फुरसतिया यूट्यूबरों, ट्विटराओं और ट्विटरियों ने बिनोद को ट्रेंड करना शुरू कर दिया। ये ट्रेंड धीरे-धीरे पूरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फैल चुका है। अब लोग बिनोद को खोज रहे हैं। कुछ लोग उसके ट्रेंड होने का कारण ढूँढ़ रहे हैं।

ऐसा करते हुए लोग ये भूल जाते हैं कि जिस बिनोद की तलाश में वे सब लगे हुए हैं वह तो हम सभी के दिलों में पैठ बनाकर बैठा हुआ है। नाम कमाने की इच्छा रखने वाला हर वो इंसान बिनोद है जो समाज सेवा करके, दान-दक्षिणा देकर या फिर कोई अच्छा और भला कार्य करने के बजाय उल्टे-सीधे और अजीबोगरीब तरीके आजमा कर अपना नाम कामना  चाहता है।

बहरहाल बिनोद का मिशन सफल हो चुका है। अब हर कोई बिनोद की चर्चा में व्यस्त है। कई फर्जी बिनोद इसका क्रेडिट लूटने के लिए सोशल मीडिया पर प्रकट हो चुके हैं। पर असली बिनोद इन सब घटनाओं को देखकर मंद-मंद मुस्कुराता हुए ट्विटराओं के ट्वीटों में, फेसबुक पोस्ट में या फिर यूट्यूब के वीडियो पर कमेंट के रूप में अपना नाम बिनोद दर्ज करने में मस्त हो रखा है।

लेखक - सुमित प्रताप सिंह

मंगलवार, 30 जून 2020

सॉरी ज़िंदगी


ब भी मैं ज़िंदगी से 
बेहद उदास हो जाता हूँ
तब मेरे दिमाग में 
ये ख्याल आता है कि
क्यों न खत्म कर लूँ खुद को 
और चला जाऊं 
इस दुनिया से बहुत दूर
ये सोचते-सोचते मुझे
रास्ते में मिल जाता है
मंदिर पर भीख माँगने वाला 
दुर्घटना में अपनी दोनों टाँगें 
गँवा बैठा कलवा भिखारी
जो चंद रुपयों की भीख पा
समझता है खुद को
इस दुनिया का
सबसे खुशहाल आदमी
कुछ दूर और चलने पर 
मिल जाती है वो लड़की
जो एक सिरफिरे के 
एक तरफा प्यार में
तेजाब से जलवा चुकी है 
अपना खूबसूरत चेहरा
अपने सारे गमों को भुला 
जब वो हँसती है न तो
उसकी हँसी बहुत हसीन लगती है
और मुझे अपनी उदासी पर 
घिन सी आने लगती है
कुछ और आगे चलने पर 
मिलता है बचपन में
अपनी आँखें खो चुका श्यामू
जो मेरी आँखों का सहारा ले
इस दुनिया को देखकर
जी भरके खिलखिलाता है
अचानक जाने मुझे क्या होता है कि 
मैं भागकर अपने 
घर की ओर जाता हूँ
और अपनी माँ की गोद में 
अपना सिर रखकर सो जाता हूँ
माँ ममता भरे हाथों से
मेरे सिर को सहलाती है तो
एक बार फिर से 
जीने का मन करता है
और मैं पछता कर कहता हूँ 
मैंने तुम्हारा मोल न समझा
सॉरी ज़िंदगी।
लेखक - सुमित प्रताप सिंह
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