रविवार, 4 फ़रवरी 2018

भारतीय सेक्युलर (व्यंग्य)

- भाई नफे!
- हाँ बोल भाई जिले!
- भाई ये सेक्युलर का मतलब क्या होता है?
- सेक्युलर अंग्रेजी का शब्द है और इसका हिन्दी में अर्थ होता है धर्मनिरपेक्ष। पर हमारे देशवासियों की जीभ हिन्दी शब्दों के अधिक प्रयोग से दुखने लगती है इसलिए हम धर्मनिरपेक्ष की बजाय सेक्युलर शब्द का ही ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। 
- भाई इस शब्द को जरा विस्तार से समझा।
- जो व्यक्ति सभी धर्मों को समान आदर व सम्मान और धर्म के आधार पर किसी व्यक्ति से कोई भेदभाव न करे उसे धर्मनिरपेक्ष अथवा सेक्युलर कहा जाता है। भारतीय संविधान में भी अपने देश भारत को सेक्युलर घोषित किया गया है। भारतीय संविधान की भूमिका में सेक्युलर शब्द 42वें संविधान संसोधन द्वारा सन 1976 ईसवी में जोड़ा गया।
- भाई लगता है तेरी भी जीभ दुखने लगी।
- भाई हिन्दी शब्दों से अन्य भारतीयों की भाँति कहीं तेरा मस्तिष्क न दुखने लगे सो मैंने धर्मनिरपेक्ष की बजाय सेक्युलर शब्द का प्रयोग किया।
- खैर छोड़ भाई वैसे भी अपना देश और भाषा इतने उदार हैं कि कोई भी घुसपैठिया आता है तो उसे प्रेमपूर्वक स्वीकार कर लेते हैं।
- हाँ ये बात तो है।
- अब तू ये बता कि अपने देश में सेक्युलर शब्द कितना कामयाब है।
- भाई अपने देश में सेक्युलर शब्द बड़े असमंजस में है।
- वो भला कैसे?
- जो खुद के सेक्युलर होने का दावा करते हैं वो असल में सेक्युलर हैं नहीं और जो सेक्युलर हैं उन्हें इन कथित सेक्युलरों द्वारा कट्टरपंथी करार दे दिया जाता है।
- भाई मैं कुछ समझा नहीं।
- भाई अपनी हिन्दू सनातन संस्कृति ऐसी रही है कि सबसे मिलजुल कर और प्रेमभाव से रहो और किसी से जाति, धर्म व समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव मत करो।
- हाँ बिलकुल ऐसी ही है अपनी संस्कृति।
- पर भारत के इन कथित सेक्युलर जीवों के अनुसार सेक्युलर होना कुछ अलग ही होता है।
- वो कैसे?
- इनके अनुसार सच्चा सेक्युलर वही है जो किसी विशेष धर्म को संरक्षण देते हुए अपने देश की संस्कृति, परंपराओं व हिन्दू धर्म को अधिक से अधिक गरियाए, देशद्रोहियों के कृत्यों का पुरजोर समर्थन करे, संस्थानों में बीफ पार्टियों का नियमित आयोजन करे, सेना को अत्याचारी व बलात्कारी घोषित कर उनपर पत्थर मारनेवालों को मासूम घोषित करे और हर वो काम करे जिससे भारत व इसकी संस्कृति का मान मर्दन हो।
- अतिविशिष्ट प्रकार के सेक्युलर जीव हैं अपने देश के सेक्युलर।
- हाँ भाई यहाँ के सेक्युलर अतिविशिष्ट प्रकार के जीव ही हैं। इनके लिए दंगा करनेवाले लोग समुदाय विशेष के होते हैं और अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए संघर्षरत लोग गुण्डे। इनके अनुसार वन्दे मातरम् और राष्ट्रगान गान गाना व तिरंगा फहराना प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत विषय होता है और विदेशी देश का झण्डा फहराना व उस देश के जिन्दाबाद नारे लगाना भटके हुए नौजवानों की मासूम गलती।
- गजब हैं ये सेक्युलर जीव। अच्छा भाई एक बात तो बता।
- पूछ।
- अपने देश के इन सेक्युलरों का निर्माण कैसे हुआ?
- विदेशी कटोरे में अरब और वेटिकन की धार्मिक निष्ठा, मार्क्स का अधकचरा ज्ञान, लेनिन और माओ के उग्र वामपंथ और बेशर्मी व चरित्रहीनता को अच्छी तरह घोंटकर मिलाया गया तब कहीं जाकर इन सेक्युलरों का जन्म हुआ।
- हा हा हा वास्तव में अद्भुत मिश्रण से उत्पन्न हुए हैं ये सेक्युलर जीव।
- भाई इन सेक्युलर जीवों की प्रजाति और कहाँ-कहाँ पायी जाती है?
- दुर्भाग्य से ये प्रजाति सिर्फ और सिर्फ अपने देश में ही पायी जाती है। दूसरे शब्दों में कहें भारतीय सेक्युलर नामक ये प्रजाति अपने देश को दुनिया में एक अलग ही पहचान प्रदान करती है।
- हा हा हा बिलकुल ठीक भाई।

लेखक : सुमित प्रताप सिंह, नई दिल्ली

कार्टून गूगल से साभार

रविवार, 28 जनवरी 2018

व्यंग्य : भांडगीरी चालू आहे


- भाई नफे!

- हाँ बोल भाई जिले!

- ये टकटकी लगाकर इतनी देर से क्या देख रहा है?

- भाई भारतीय संस्कृति की जलती हुई चिता को देख रहा हूँ।

- भला वो कौन दुष्ट है जिसने भारतीय संस्कृति की चिता को जलाने का दुस्साहस किया?

- भाई मध्यकाल में ये काम तुर्की और मुग़ल आतताइयों ने किया, आधुनिक काल में ये काम अंग्रेजों ने संभाला और देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद अंग्रेजों की अवैध संतानों और मार्क्स के वामपंथी सपूतों ने इस जिम्मेवारी को बखूबी निभाया और इन दिनों फ़िल्मी भांड और उनके टुकड़ों पर पलनेवाले मीडिया समूह व कथित बुद्धिजीवी इस कार्य को बखूबी से अंजाम दे रहे हैं।

- भाई इसमें कुछ न कुछ कमी तो हमारी भी होगी।

- हाँ बिलकुल कमी है। हम सबने ने ही इन्हें पाल-पोसकर इस लायक बनने में सहायता की कि ये हमारी सनातन संस्कृति धूमिल करने का दुस्साहस करने लगे और उन्हें संरक्षण देने के लिए हमारे देश के कथित बुद्धिजीवियों और बिकाऊ मीडिया ने कमान संभाल ली।

- भाई जहाँ तक मैंने जो थोड़ा-बहुत इतिहास पढ़ा है उसमें बताया है कि भारत पर हमला करनेवाली लुटेरे मुहम्मद गौरी की सेना में एक टुकड़ी हिंदुओं की भी थी जिसका नेतृत्व तिलक नामक हिंदू सेनापति किया था।

- बिलकुल सही पढ़ा है और ये हिंदू होकर भी हिंदुओं की परम्पराओं और संस्कृति का अंध विरोध करनेवाले व्यक्तियों के पुरखे शायद तिलक और उसके सैनिक ही रहे होंगे।

- हा हा हा भाई वैसे तेरी बात में दम है। अच्छा भाई मेरे एक प्रश्न का उत्तर देगा?

- हाँ पूछ!

- ये फ़िल्मी भांड की परिभाषा क्या है?

- भांड से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो चंद रुपयों के लिए अपने मान-सम्मान को खूँटी पर टांगकर दूसरों का मनोरंजन कर उन्हें खुश करता है। फ़िल्मी भांड उसका विकसित रूप है। फ़िल्मी भांड धन की खातिर अपनी माँ-बहन और बेटियों को भी फ़िल्मी पर्दे पर दर्शकों के सामने उनका मनोरंजन करते हुए उन्हें खुश करने के लिए नंगा नचवाने का भी जिगर रखते हैं। फिर औरों के परिवार की स्त्रियों के मान-सम्मान की इनसे भला उम्मीद ही कैसे कर सकते हैं?

- हा हा हा भाई क्या जिगर पाया है फ़िल्मी भांडों ने। भाई मतलब ये है कि आत्म-सम्मान और फ़िल्मी भांड उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव की माफिक हैं जिनका कभी भी मिलन नहीं हो सकता।

- और इन फ़िल्मी भांडों को संरक्षण देने के लिए न्यायालय, सरकार, कथित बुद्धिजीवी गैंग और मीडिया विशेष रूप से उत्सुक और लालायित रहते हैं।

- भाई इन्हें सुधारने का तरीका क्या है?

- तरीका सिर्फ एक है। जब तक हमारे हिंदू समाज के लोग जाति-पाति का भेद छोड़ इस बात पर मिलकर विचार नहीं करेंगे कि आज यदि किसी जाति के महापुरुष का फ़िल्मी भांडों द्वारा मानमर्दन करने पर बाकी जातियों के बंधु शांत रहे या फिर उन्होंने इस उपहास का विषय बनाया तो अगला नंबर उनकी जाति के महापुरुष अथवा सम्मानीय व्यक्ति का भी आ सकता है। इसलिए आपसी एकता समय की मांग है।

- भाई फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या होगा?

- भाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इस बात की अनुमति नहीं देती कि किसी जाति, समुदाय अथवा धर्म के प्रतीकों, परंपराओं व महापुरुषों का अपमान किया जाए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तब किधर चली जाती है जब पुस्तक के माध्यम से अपने धर्म की कुरीतियों को दुनिया के सामने लानेवाली पड़ोसी देश की एक लेखिका को अपने देश में रहने अथवा कोई भी कार्यक्रम करने को मना किया जाता है? या फिर हिंदू धर्म के अलावा किसी और धर्म पर कुछ लिखने या फिर कुछ दर्शित करने के नाम पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जाने कहाँ लापता हो जाती है?

- उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लघुशंका व दीर्घशंका के माध्यम से इनके पतलून अथवा पायजामे में लीन हो जाती है।

- हा हा हा अब आया न लाइन पर।

- वैसे भाई इस भांडगीरी के बंद होने के आसार हैं या फिर ये यूँ ही चलती रहेगी।

- अभी हिंदू समाज ने हल्की-हल्की पलकें खोलीं हैं। जब हिंदू समाज की आँखें पूर्ण रूप से खुल जायेंगीं तब न तो फ़िल्मी भांड रहेंगे और न उनकी भांडगीरी। तब तक ये भांडगीरी चालू आहे।

- आता माझी सटकली। अब लगता है कि इस भांडगीरी को बंद करने के लिए हम सभी को जागना ही पड़ेगा।

- जागोगे तो ही सवेरा होगा। वरना ये अंधकार गहराता ही जाएगा।

- भाई ये अंधकार छंटेगा और उसके बाद होनेवाले उजियारे से भारतीय संस्कृति के बैरियों की आँखे चुंधिया जायेगी।

- मेरी भी ईश्वर से कामना है कि काश ऐसा ही हो।

लेखक : सुमित प्रताप सिंह, नई दिल्ली


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