शनिवार, 23 जनवरी 2016

यादगार रहा विश्व पुस्तक मेला 2016



-भाई नफे!
-हाँ बोल भाई जिले!

-कैसे उदास बैठा है?
-उदास नहीं हूँ भाई मैं तो यादों में खोया हुआ हूँ।
-कौन है वो खुशनसीब हसीना जिसकी यादों में खोया हुआ है?
-भाई किसी हसीना की यादों में नहीं मैं तो विश्व पुस्तक मेले की मधुर यादों में खोया हुआ था।
-अच्छा तो ये बात है। तो हमें भी विश्व पुस्तक मेले की मधुर स्मृतियों से रूबरू करवा।
-भाई विश्व पुस्तक मेला 9 जनवरी, 2016 को शुरू हुआ। शोभना वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित शोभना सम्मान समारोह में देश के गिने-चुने लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए शोभना सम्मान-2015 से विभूषित किया गया।
-अरे वाह! भाई शोभना सम्मान किस-किसको दिया गया?
- साहित्य में शोभना सम्मान प्राप्त करने वाले प्रसिद्द कथाकार बल राम, मुम्बई के कहानीकार सूरज प्रकाश, पंजाब के लघुकथाकार श्याम सुंदर अग्रवाल व लखनऊ के व्यंग्यकार अनूप श्रीवास्तव को दिया गया। संपादन में प्रवासी संसार के डॉ. राकेश पाण्डेय, हल्द्वानी के अनूप वाजपेयी, बिहार के रणविजय राव, अट्टहास की शिल्पा श्रीवास्तव, दिल्ली के आशीष कंधवे व मेरठ के प्रदीप कुमार को मिला। समाज सेवा के क्षेत्र में युवाओं के लिए कार्यरत झारखण्ड के गोपाल भगत व बाल शिक्षा के लिए जयपुर व गुड़गाँव में संघर्षरत डॉ. अनुभूति भटनागर को शोभना सम्मान प्रदान किया गया। आलोचना के क्षेत्र में रांची के डॉ. रमेश तिवारी को तथा व्यंग्य के क्षेत्र में शोभना सम्मान 'पैकेज का पपलू' व 'दोराहे पर जिंदगी' के लेखक हल्द्वानी के गौरव त्रिपाठी को दिया गया वहीँ कला के क्षेत्र में अर्चना शाह अग्रवाल को सम्मानित किया गया तथा इटावा के नितिन जैन को कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में शोभना सम्मान दिया गया।
-इसका मतलब है विश्व पुस्तक मेले की शुरुआत शोभना सम्मान से ही हुई।
-नहीं यह विश्व पुस्तक मेले का दूसरा कार्यक्रम था। पर हाँ इसमें लोकार्पित हुई पुस्तक 'सावधान पुलिस मंच पर है' मेले में सबसे पहले लोकार्पित होनेवाली पुस्तक थी।
-अरे वाह! भाई इस कार्यक्रम के अतिथि कौन-कौन थे?
-भाई कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यंग्य यात्रा के संपादक डॉ. प्रेम जनमेजय ने की, मुख्य अतिथि डॉ. हरीश नवल रहे तथा विशिष्ट अतिथि प्रताप सहगल थे। वक्ता के रूप में डॉ. शशि सहगल उपस्थित रहीं। सानिध्य सोसाइटी की अध्यक्षा शोभना तोमर का रहा तथा कार्यक्रम का संचालन अपने सुमित प्रताप सिंह ने किया।
-तो मेले में उपस्थित जनसमूह की क्या प्रतिक्रिया रही?
-प्रतिक्रिया अच्छी रही। श्रोताओं ने सभी अतिथियों व वक्ताओं को सुना एवं सराहा।
-ये तो बहुत बढ़िया बात है। अच्छा वहाँ किन-किनसे मिलने का अवसर मिला?
-बहुत से जाने-अनजाने लोग मिले। नरेंद्र कोहली, ज्ञान चतुर्वेदी, गिरिराजशरण अग्रवाल, सुधाकर अदीब, लालित्य ललित, सुभाष चंदर, अशोक मिश्र, कौशलेन्द्र प्रपन्न, मलय जैन, अनुज त्यागी, सुधांशु माथुर, प्रदीप राय, विजय शंकर चतुर्वेदी, हरीश अरोड़ा, मीना अरोड़ा, अलका अग्रवाल, नेहा शरद, संगीता कुमारी, दीपक सरीन इत्यादि सुधीजनों से मिलने और खिलने का अवसर मिला।
-भाई मेले में भीड़ कैसी रही?
-भीड़ खूब रही। इस बार बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमी पुस्तक मेले में आए और अपने साथ पुस्तकों से भरे थैले लेकर गए।
-कमाल है। डिजिटल युग में भी थैला भर किताबें ले गए?
-हाँ भाई क्योंकि पुस्तक के पन्नों को उँगलियों से स्पर्श कर पढ़ने की अनुभूति का आनंद वो भली-भाँति जानते हैं। इसलिए डिजिटल युग में भी अपने-अपने पसंद के लेखक की पुस्तकें खरीदने की चाहत लिए हुए वो भागे-भागे पुस्तक मेले घूमने पहुँचे थे।
-ये तो अच्छी बात है। अच्छा मेले में और क्या-क्या हुआ?
-मेले में अनेक लेखकों की पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। भिन्न-भिन्न विषयों पर विचार गोष्ठियों का आयोजन हुआ। लेखकों व पाठकों का आपसी परिचय हुआ। कुछ नए लेखकों के लेखन को जहाँ प्रतिष्ठा मिली वहीँ पुराने व वरिष्ठ लेखकों के अनुभवों से युवा हस्ताक्षरों को कुछ सार्थक सीखने को मिला। व्यंग्य यात्रा पत्रिका द्वारा आयोजित व्यंग्य की तीन पीढ़ियों के बीच संवाद द्वारा व्यंग्य विधा ने विश्व पुस्तक मेले में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज़ करवाई। इसके अलावा कुछ लोगों ने मंच से चिपकने का व कुछ ने शाल ओढ़ने में रिकॉर्ड भी बनाया। 
-हा हा हा तू ये बता कि तूने कोई रिकॉर्ड बनाया या नहीं?
-हाँ बिलकुल बनाया।
-वो भला क्या?
-इस बार सबसे ज्यादा पुस्तक मेले में घूमने का। 
-हा हा हा ये भी सही है। इसका मतलब है कि तूने पुस्तक मेले का खूब मजा लूटा।
-हाँ भाई और अगले साल भी इसका पूरा मजा लूटने की योजना है।
-अगली बार तू पूरा मजा नहीं लूट पाएगा।
-वो कैसे?
-क्योंकि अगले विश्व पुस्तक मेले में नफे के साथ आधा मजा जिले भी लूटनेवाला है।
-ऐसा क्या?
-हाँ भाई बिलकुल। अगली बार मैं भी तेरे विश्व पुस्तक मेले में मौजूद रहूँगा।
-अरे वाह भाई फिर तो मेले में घूमने का मजा दुगुना हो जाएगा।

-----------समाप्त----------

लेखक : सुमित प्रताप सिंह



मंगलवार, 12 जनवरी 2016

सावधान पुलिस मंच पर है का लोकार्पण व शोभना सम्मान


दिल्ली : हर वर्ष की भांति इस बार भी शोभना वेलफेयर सोसाइटी ने शोभना सम्मान समारोह का आयोजन किया। यह सोसाइटी द्वारा आयोजित तीसरा सम्मान समारोह था। इस बार भी सोसाइटी द्वारा देश भर से विभिन्न क्षेत्रों में अपना सक्रिय योगदान देनेवाले सुधीजनों को शोभना सम्मान-2015 से विभूषित किया गया। यह सम्मान समारोह आज दिनांक 9 जनवरी, 2016 को नई दिल्ली में प्रगति मैदान में आयोजित होनेवाले विश्व पुस्तक मेले में लेखक मंच पर दोपहर 2.30 से सांय 4 बजे के बीच आयोजित किया गया। 


इस सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. हरीश नवल थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यंग्ययात्रा त्रैमासिक पत्रिका के संपादक डॉ. प्रेम जनमेजय ने की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि की भूमिका वरिष्ठ साहित्यकार प्रताप सहगल ने निभाई एवं सानिध्य रहा शोभना वेलफेयर सोसाइटी की अध्यक्षा शोभना तोमर का तथा इस कार्यक्रम का सफल संचालन युवा साहित्यकार सुमित प्रताप सिंह ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ युवा साहित्यकार सुमित प्रताप सिंह की चौथी पुस्तक ‘सावधान पुलिस मंच पर है’ का लोकार्पण करके किया गया। 

पुस्तक लोकार्पण के पश्चात् सुमित ने अपनी चिर-परिचित विशिष्ट शैली में इसी पुस्तक में संग्रहित ‘अच्छा है बकरापन’ कविता सुनाकर श्रोताओं का मनोरंजन किया। हल्द्वानी के युवा व्यंग्यकार ने सुमित की लेखन शैली पर अपना वक्तव्य देते हुए बताया कि सुमित की लेखन शैली बिलकुल अलग प्रकार की है और उनके द्वारा लेखन में लिए गए नए-नए विषय हरिशंकर परसाईं की लेखन शैली का स्मरण कराते हैं। मुख्य अतिथि डॉ. हरीश नवल ने कहा कि सुमित के लेखन में अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में विभिन्न रस मौजूद हैं और सुमित की विशेषता है कि इनके लेखन में मलीनता नहीं है। सुमित यदि हास्य लिखना आरंभ करते हैं तो उसे पढ़कर निर्मल आनंद की अनुभूति होती है और इनका श्रृंगार रस में लेखन अच्छा है। इसके साथ उन्होंने सुमित को लेखन में सुनहरे भविष्य की शुभकामनाएँ दी. श्रीमती शशि सहगल ने सुमित की पुस्तक की प्रशंसा की और उनकी कविता ‘एक लड़की मुझको भाती है’ को विशेष रूप से सराहा। विशिष्ट अतिथि प्रताप सहगल व कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. प्रेम जनमेजय के अध्यक्षीय भाषण के उपरांत शोभना सम्मान-2015 का वितरण किया गया।
शोभना सम्मान-2015 प्राप्त करनेवालों की सूची निम्नलिखित है : -
साहित्य- श्री बलराम, श्री सूरज प्रकाश, श्री अनूप श्रीवास्तव, लघुकथा साहित्य - श्री श्याम सुन्दर अग्रवाल, संपादन- डॉ. राकेश पाण्डेय, डॉ. रणविजय राव, श्री आशीष कंधवे, श्रीमती शिल्पा श्रीवास्तव, श्री प्रदीप कुमार, श्री अनूप वाजपेयी, समाज सेवा– श्री गोपाल भगत एवं डॉ. अनुभूति भटनागर, कला- सुश्री अर्चना शाह अग्रवाल, आलोचना - डॉ. रमेश तिवारी, व्यंग्य - श्री गौरव त्रिपाठी, कंप्यूटर शिक्षा- श्री नितिन जैन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. राकेश पांडेय द्वारा वरिष्ठ साहित्यकार रवीन्द्र कालिया के निधन के विषय में सूचित किए जाने पर शोभना सम्मान समारोह के उपरांत दो मिनट का मौन रखकर उनकी दिवंगत आत्मा के लिए शांति की प्रार्थना की गयी।
इस अवसर पर सोसाइटी के सचिव धैर्य प्रताप सिकरवार, संयुक्त सचिव मोहन कुमार, वरिष्ठ पत्रकार गुलशन भाटी, रामजनम सिंह, वेद प्रकाश शास्त्री, बी.के.सिंह, रशीद अहमद, मो. रेहान व रविन्द्र चौहान इत्यादि सुधीजन मौजूद रहे।

रिपोर्ट : संगीता सिंह तोमर 

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