शुक्रवार, 1 मई 2020

हास्य कविता - टहलू इंसान



र कोई इंसान भला 
घर में कहाँ बहलता है
इसलिए विवश हो वह
घर से बाहर जा टहलता है
घर में वह रुक जाए 
ये भी भला कोई बात है
उसकी तो एक अलग ही 
टहलू नाम की जमात है
बेशक कैसी भी रोक हो
कोई भी सरकारी टोक हो
वह इंसान हर रोक-टोक को
बड़ी बेदर्दी से नकार देगा
जब तक आप उसे टोकेंगे
वह पार्क का एक चक्कर काट लेगा
जब अकेले टहलने से  
वह बहुत ऊब जाएगा
तब टहलू जमात के साथ
वह गप्प में डूब जाएगा
जब रंगे हाथों वह पकड़ा जाएगा
तो झट से ढेरों बहाने बनाएगा
मैं तो आया था माँ की दवाई लेने
या फिर बच्चे की जिद पर मिठाई लेने
पत्नी के आदेश से रौशनाई लेने 
या फिर ओढ़ने को नई रजाई लेने 
उसका कोई न कोई बहाना
आखिर काम कर ही जाएगा 
और पकड़े जाने से वह
बाल-बाल बच जाएगा
यूँ बच जाने पर वह 
खुशी के मारे ऊल जाएगा
और कुछ देर बाद टहलने को 
फिर किसी पार्क में कूद जाएगा।
लेखक - सुमित प्रताप सिंह



बुधवार, 29 अप्रैल 2020

गीत : गाथा कोरोना वारियर्स पत्रकारों की


एक-एक पल की खबर दिखाते 
घर, कूँचों और गलियारों की
आओ हम सब मिल गाथा गायें
कोरोना वारियर्स पत्रकारों की
कोई खबर न छूटे जिनसे
हो मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों की
आओ हम सब मिल गाथा गायें
कोरोना वारियर्स पत्रकारों की

सर्दी, गर्मी, बारिश की 
ये परवाह कभी न करते हैं
देश के हर हालात पे
ये ध्यान सदा ही धरते हैं
 ये देश का चौथा खंबा कहलाते
हम कद्र करें इन उजियारों की 
आओ हम सब मिल गाथा गायें
कोरोना वारियर्स पत्रकारों की

देश में झगड़े-दंगे हों 
या फैले कोई महामारी
पत्रकार कर्तव्य निभा 
जुटा लाते खबरें सारी
अंदाज अलग, है बात अलग
देश के इन बलिहारों की
आओ हम सब मिल गाथा गायें
कोरोना वारियर्स पत्रकारों की

ये बिना सुरक्षा जीते हैं
पर चिंता राष्ट्र की करते हैं
इनमें से जाने कितने अक्सर
बदहाली-तंगहाली में मरते हैं 
फिर भी इनकी कोशिश रहती
देश से, हो छटा दूर अंधियारों की 
आओ हम सब मिल गाथा गायें
कोरोना वारियर्स पत्रकारों की

लेखक : सुमित प्रताप सिंह

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